Joint-Care : Joint Replacement & Arthroscopy Super-speciality Services

Joint-Care : Joint Replacement & Arthroscopy Super-speciality Services M ch Orth (UK) MS Orth Dr. S.S.Soni is a most renowned orthopedic surgeon in jaipur, who specializes in joint replacement and arthroscopy.
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M ch Orth (UK) MS Orth
Dr. S.S.Soni is a most renowned orthopedic surgeon in jaipur, who specializes in joint replacement and arthroscopy.

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जयपुर।

टोटल नी रिपलेसमेंट (घुटना बदलना) और वह भी छोटे से चीरे के जरिए। न कोई दर्द और ना परेशानी। खास बात यह रही कि मरीज दो घंटे बाद बिना किसी सहारे के चलने लगे। सुनने में आश्चर्यजनक लगता है, मगर जयपुर के डाॅक्टरों ने यह कारनामा कर दिखाया है।

अमेरिका सहित विदेशों में कई जगह घुटना बदलने में अपनाई जा रही अत्याधुनिक तकनीक मिनी सब वास्टस के जरिए डाॅक्टरों ने एक 59 वर्षीय मरीज का टोटल नी रिपलेसमेंट किया है।
दरअसल, यह एक तरीके से डे केयर नी रिपलेसमेंट सर्जरी है, जो भारत में अभी प्रचलन में नहीं है। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हाॅस्पीटल के ज्वाइन्ट रिपलेसमेंट एंड आॅर्थोस्काॅपी सर्जन डाॅ. एस.एस. सोनी और उनकी टीम ने यह जटिल व रेयर सर्जरी करके मरीज का घुटना बदला है।

इस तरह किया आॅपरेशन

दरअसल जयपुर जिले के चैमूं के पास रोजड़ा गांव का नरसीराम (59) काफी समय से घुटनों के दर्द से परेशान था और चल फिर नहीं पाता था। कई अस्पतालों में डाॅक्टरों को दिखाने के बाद भी लाभ नहीं मिला तो किसी ने उसे नारायणा अस्पताल में जाने को कहा। इस पर नरसी ने अस्पताल के डाॅ. एस.एस. सोनी को दिखाया। डाॅ. सोनी ने जांच के बाद देखा कि मरीज आॅस्टयो आर्थराइटस से पीड़ित है, तो उसके परिजनों को आॅपरेशन से घुटना बदलवाने की सलाह दी। परिजनों को बताया गया कि आॅपरेशन अत्याधुनिक तकनीक से होगा और इसमें मरीज को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। डाॅ. सोनी ने बताया कि मरीज नरसीराम के दोनों घुटने खराब थे। अत्याधुनिक मिनी सब वास्टस तकनीक में एक बार में एक घुटना ही बदला जा सकता है। इसलिए उसका दांया घुटना बदलने का निर्णय लिया।

एक दिन भर्ती, अगले दिन चलने लगा –

नरसीराम अस्पताल में 17 नवंबर को भर्ती किया गया और अगले दिन 18 नवंबर को उसका आॅपरेशन कर दिया गया। करीब सवा घंटे में आॅपरेशन हुआ और अगले ही पल मात्र दो घंटे बाद मरीज अपने पैरों पर खुद चलने लगा। आमतौर पर घुटना बदलने ( टोटल नी रिपलेसमेंट) के बाद मरीज तीन हफ्ते से लेकर महीने भर तक चल नहीं पाता और उसे वाॅकर के सहारे चलाया जाता है।

यह तकनीक अपनाई –

डाॅ. सोनी ने बताया कि नी रिपलेसमेंट के लिए मिनी सब वास्टस तकनीक में घुटने में मात्र 11 सेंटीमीटर का चीरा लगा कर आॅपरेशन किया गया। जबकि आम तौर पर घुटना बदलने में 17 से 20 सेंटीमीटर का चीरा लगाना पड़ता है। इससे मरीज को दर्द भी ज्यादा होता है और रिकवरी में भी समय लगता है। नारायणा अस्पताल में हुए इस आॅपरेशन में कहीं भी घुटना डिसलोकेट नहीं किया गया और न मांसपेशियों को काटा गया। मांसपेशियों को आॅपरेशन के दौरान एक तरफ करने के बाद में पुनः उसी स्थान पर सेट कर दिया गया। इस कारण मरीज को किसी तरह का दर्द भी नहीं हुआ। मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। आॅपरेशन टीम में डाॅ. विनोद शर्मा व डाॅ. हिमेश सिंघल शामिल थे।

किन मरीजों में कारगर –

मिनी सब वास्टस तकनीक उन्हीं मरीजों में अपनाई जा सकती है जो ज्यादा मोटे न हों, स्वस्थ शरीर हो, डायबिटीज आदि न हो। मरीज फिट हो तो फिर उम्र चाहे कितनी हो, यह सर्जरी कारगर रहती है। छोटा चीरा लगने और मांसपेशियों को नहीं काटने और घुटना डिसलोकेट नहीं होने से मरीज को दर्द व आगे भविष्य में कोई परेशानी भी नहीं रहती।

इनका कहना है…

मिनी सब वास्टस तकनीक अत्याधुनिक है। इसमें मामूली चीरा लगाकर आॅपरेट किया जाता है। इस कारण मरीज दो घंटे में ही चलने लगा। भविष्य में भी उसे चलने फिरने में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी। भविष्य में यह नई तकनीक नी रिपलेसमेंट में पुराने ट्रीटमेंट की जगह लेगी।

– डाॅ. एस.एस. सोनी, ज्वाइंट रिपलेसमेंट एंड आॅथर्स्कोपी सर्जन

इस तरह की आॅपरेशन तकनीक मरीजों को राहत देने वाली है। अस्पताल में आगे भी मरीजों के लाभ के लिए ऐसी नई नई तकनीकें अपनाई जाएंगी।

– डां. माला ऐरन, जाॅनल क्लीनिकल डायरेक्टर, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हाॅस्पीटल

   14 days ago
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EVER THOUGHT YOUR KNEE PAIN COULD BE CHONDROMALACIA PATELLAE..?
"You see things and say 'Why?'; but I dream things that never were and I say 'Why not?'" - George Bernard Shaw

Positive treatments at Joint Care -

The abnormal softening of the cartilage that resides right under the kneecap or patella is called chondromalacia patellae. It is deemed as the predominant cause of anterior knee pain and chronic knee pain. Misalignment of the knee cap occurs as it slides over the lower end of the thigh bone leading to cartilage degeneration, which means the patellar tracking is noticed towards the outside of the femur. Very popularly, the condition is also known as “runner’s knee” due to its common manifestation among athletes and athletic individuals. This patellofemoral syndrome is aggravated due to prolonged bent knees and sitting down. There are several causes to the chondromalacia patellae such as:

 Overuse of the knees – mostly attributed to playing sports
 Misalignment of the knee – due to muscle imbalance around the knee
 Trauma and repeated injury to the knees - can cause slack in ligaments a condition called hypermobile joints

The common symptoms noticed are pain located especially in front of the knee, grinding or grating noise during crepitus, and some effusion (rarely) of the knee joint.

Joint-Care, Jaipur is headed by Dr. Shyam Sunder Soni who is a pioneer in orthopaedic surgery. Dr. Soni specializes in performing mosaicplasty also known as autologous osteochondral transfer – the intricate process of transferring cartilage from the healthy part of a joint to the damaged area. A unique tool is used to extract a plug of the cartilage (< 1 cm in diameter) and subchondral bone from the portion of the bone that does not bear much weight. The technique has several advantages. Complaints due to osteochondral lesions are drastically reduced and the surgery does not invite any immunological reactions since patients’ own bone and cartilage is used for the purpose.

To know more about mosaicplasty and how it can help you call Dr. Shyam Sunder Soni today.

   Over a month ago
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